उच्च न्यायालय ने नवनिर्वाचित ग्राम प्रधान के वित्तीय अधिकारों पर लगाई रोक!

उच्च न्यायालय ने नवनिर्वाचित ग्राम प्रधान के वित्तीय अधिकारों पर लगाई रोक!

सम्बन्धित प्रकरण को आठ सप्ताह में निर्णय लेने को कहा

रिपोर्ट:-इन्द्रजीत भारती

नौगढ़,चन्दौली(प्यारी दुनिया)।उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने क्षेत्र के ग्राम पंचायत बसौली से निर्वाचित ग्राम प्रधान पप्पू गोड़ के वित्तीय अधिकार पर रोक लगाकर संबंधित प्राधिकरण को 8 सप्ताह के अंदर निर्णय लेने को कहा है।
इस बारे में बताया जाता है कि ग्राम प्रधान बसौली जनपद चन्दौली के पद का आवेदन करने वाले जनपद सोनभद्र के पड़रीकला गांव निवासी पप्पू गोड़ पुत्र मानिक निवासी ग्राम पड़रीकला परगना विजयगढ़ जो कि काफी दिनों से क्षेत्र के बसौली गांव के निवासी एक ब्यक्ति के यहां रहकर के उन्हीं का भैंस चराता है।
इस बार आरक्षण के परिसीमन मे ग्राम पंचायत बसौली की सीट आरक्षित हो जाने पर उसका स्थानीय दस्तावेज के सहारे जाति निवास प्रमाण पत्र परिवार रजिस्टर का नकल ईत्यादि कागजात जारी कराकरके ग्रामप्रधान पद का आवेदन दाखिल कराया गया था।जिसपर वह विजयी भी हो गया.
शिकायत कर्ता ने सहायक निर्वाचन अधिकारी/उप जिलाधिकारी डा.अतुल गुप्ता को प्रार्थना पत्र देकर के बताया कि पप्पू गोड़ पुत्र मानिक निवासी ग्राम पड़रीकला के नाम से जनपद सोनमद्र के उप जिलाधिकारी द्रारा निवास प्रमाण पत्र व तहसीलदार द्रारा अनुसुचित जनजाति का प्रमाण पत्र दिनांक 10 अप्रैल 2021 को जारी किया गया है।जबकि उसका अनुसुचित जाति का जाति प्रमाण पत्र निवास प्रमाण पत्र तहसील नौगढ़ से भी जारी हुआ है।आधार कार्ड नंबर 40208810 8132 से पड़रीकला सोनमद्र व बसौली जनपद चन्दौली का जारी है।पप्पू पुत्र मनिक के नाम से जो भूमिधरी जमीन है।उसके इंतखाब पर पता पड़रीकला का ही दर्ज है।
तहसीलदार लालता प्रसाद ने जानकारी होने के बाद 19 अप्रैल को पप्पू गोड़ को जारी अनुसुचित जाति का जाति प्रमाण पत्र निरस्त कर दिया था।
जिस पर याची पप्पू गोड़ ने उच्च न्यायालय इलाहाबाद में रिट WRIT-C No 15848 Of 2021 योजित कर तहसीलदार नौगढ द्रारा जारी जाति प्रमाण पत्र को रद्द करने के आक्षेपित आदेश को चुनौती दिया था।
और बताया था कि आदेश पारित होने के समय याचिकाकर्ता को नहीं सूना गया था।
जिस पर उच्च न्यायालय ने आदेश निर्गत किया है कि यह प्रकरण राज्य प्राधिकरण द्वारा भी सूना जा सकता है। तहसीलदार से उपर उप मंडल मजिस्ट्रेट जो कि जाति प्रमाण पत्र निरस्त होने पर फैसला करने के लिए अधिकृत है।याचिकाकर्ता को ग्राम प्रधान के रूप में चुना गया है।लेकिन उसके जाति प्रमाण पत्र के बारे में उपजा विवाद का पटाक्षेप नहीं हो जाता है तब तक संबंधित प्राधिकारी के निर्णय लिए बगैर उसे किसी भी वित्तीय सौदे में शामिल नहीं किया जा सकता है।याचिका को निस्तारित कर उच्च न्यायालय ने 8 सप्ताह में संबंधित प्राधिकरण को निर्णय लेने के लिए कहा है।

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